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दिल्ली के श्री फोर्ट ऑडिटोरियम में तीन घंटे के म्यूजिकल मेडिटेशन में 1200 से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया

10 मार्च 2022, नई दिल्ली: 1990 में ब्रह्मर्षि पत्रीजी द्वारा गठित गैर-धार्मिक संगठन पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (पीएसएसएम) द्वारा आयोजित सामूहिक म्यूजिकल मेडिटेशन में हिस्सा लेने के लिए पूरे भारत से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 1200 से ज्यादा लोग इकठ्ठा हुए। तीन घंटे चलने वाले इस इमर्सिव इवेंट को 'निर्वाण पथ - स्वयं को जानो' के शीर्षक से आयोजित किया गया था। इसमें बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। इस कार्यक्रम में सभी ने पत्रीजी के मार्गदर्शन में लाइव म्यूजिक के दौरान मेडिटेशन किया। इस मेडिटेशन कार्यक्रम ने न केवल व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लेने वाले लोगों के लिए रिलैक्सेशन (विश्राम) और  शांति के रूप में काम किया, बल्कि डिजिटल रूप से कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले लाखों व्यक्तियों के लिए भी इसने एक समान प्रभाव डाला।

कार्यक्रम की थीम को ध्यान में रखते हुए इसमें हिस्सा लेने वाले सभी लोगों ने पिरामिड टोपी पहनी थी। यह सब ब्रह्मर्षि पत्रीजी के साथ एक लाइव ऑनलाइन सेशन के साथ शुरू हुआ। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट (पीएसएसएम) के संस्थापक की पत्नी स्वर्णमाला पत्रीजी जी ने दीप प्रज्ज्वलन के बाद पोस्ट कोविड की दुनिया में मेडिटेशन करने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

श्रीमती स्वर्णमाला पत्रीजी ने अपने संबोधन में कहा, "श्रीमान पत्रीजी ने लोगों को मेडिटेशन के महत्व के बारे में शिक्षित करने और शाकाहारी बनने में लोगों की सहायता करने के लिए अथक प्रयास किया है। आज डिजिटल मीडिया इस पहल को आगे बढ़ाने में हमारी मदद कर रहा है। इस वजह से बड़ी संख्या में लोग हमसे जुड़ रहे हैं और मेडिटेशन और शाकाहार को अपना रहे हैं।"

मंच पर शामिल होने वाले अन्य गणमान्य लोगों में सीनियर पिरामिड मास्टर और पूर्व प्रेसिडेंट ऑफ़ कंपनी सेक्रेटी ऑफ़ इंडिया दतला हनुमंत राजू और  जी. बालकृष्ण, जसविंदर कौर, रचना गुप्ता, वसंत शास्त्री, पीवी रामाराजू, दीप्ति नडेला सहित पीएसएसएम के अन्य सीनियर पिरामिड मास्टर थे। एम. नवकांत, और आनंद कुमार। पीएसएसएम कार्यक्रम के स्वयंसेवकों ने भीड़ को संभालने का काम किया और शान्ति से मेडिटेशन करने में उनकी मदद की। सिद्ध वीणा पर सिद्धार्थ बनर्जी, तबले पर ज़हीन खान, वायलिन पर राघवेंद्र, और मृदंगम पर आर. केशवन द्वारा लाइव संगीत दिया गया था। नए-नए मेडिटेशन करने वाले लोगों ने भी अपने अनुभव और मेदिटेशन का उन पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी साझा की।

पीएसएसएम की स्थापना आध्यात्मिक वास्तविकताओं और आध्यात्मिक विज्ञान की मूल बातों को हर किसी तक फैलाने के उद्देश्य से की गई थी। पीएसएसएम की स्थापना साल 1990 में "द कुरनूल स्पिरिचुअल सोसाइटी" के रूप में हुई थी। आज पीएसएसएम में हजारों स्वतंत्र और स्वायत्त पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटी, कई पिरामिड सेंटर शामिल हैं। इन सेंटर में भारत के सभी राज्यों में लाखों सक्रिय सदस्य और स्वयंसेवक शामिल हैं। यह अमेरिका, यूके, यूएई, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, वियतनाम, मिस्र, दक्षिण अफ्रीका और 20 अन्य देशों में भी मौजूद है।

सीनियर पिरामिड मास्टर और पूर्व प्रेसिडेंट ऑफ़ कंपनी सेक्रेटी ऑफ़ इंडिया दतला हनुमंत राजू ने अपने भाषण में कहा, "32 साल पहले अपनी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पत्रीजी ने जमीनी स्तर से इस पहल की शुरुआत की। उन्होंने गाँव-गाँव में जाकर, कस्बों और शहरों में घर-घर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को मेडिटेशन करने के लिए आन्दोलन को आगे बढ़ाया। जब मैं 2010 में उनसे मिला, तो मेरे जीवन में सब कुछ बदल गया। अब  की सहायता से मेडिटेशन को जनता के घरों तक ले जाने में सक्षम है। भारत की 8 से ज्यादा क्षेत्रीय भाषाओं में इसकी उपस्थिति होने से हम साधकों को उनकी परिवर्तनकारी यात्रा में सहायता करने के लिए अपने देखभाल केंद्रों के माध्यम से ऑफ़लाइन सहायता भी प्रदान करते हैं। निर्वाण पथ ऑफ़लाइन और ऑनलाइन समुदाय को जोड़ने और मेडिटेशन के क्षेत्र का विस्तार करने के लिए पीएसएसएम  द्वारा चलाई गई एक सामुदायिक पहल है।"

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